Tuesday, October 25, 2022

कम्युनिस्ट पार्टी में ब्रांच सचिव का कर्त्तव्य – हन्नान मोल्ला

पहले तो कम्युनिस्ट पार्टी जैसे क्रांतिकारी दल में एक ब्रांच का महत्व समझना जरूरी है। जैसे मानव शरीर अनगिनत सेल का समन्वय है, ऐसे ही मजदूर वर्ग की पार्टी अनगिनत ब्रांचों का समन्वय है। ब्रांच एक निश्चित क्षेत्र में पार्टी के राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व सांगठनिक नेतृत्व कायम करने का सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। सही मायने में कह सकते हैं कि यह एकमात्र हथियार है। पूरे भारत में पार्टी के महासचिव की जो भूमिका है, पूरे बिहार में राज्यसचिव की जो भूमिका है, ब्रांच सचिव की ब्रांच की सीमा के अन्दर भूमिका उससे कम नहीं है। ये बातें हम समझेंगे, तभी हमें अपनी जिम्मेदारी का एहसास होगा।

पार्टी नेतृत्व दो प्रकार के होते हैं-राजनीतिक नेतृत्व और सांगठनिक नेतृत्व। पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रम का फैसला राजनीतिक नेतृत्व करता है। केन्द्रीय कमिटी, राज्य कमिटी, जिला कमिटी या तहसील कमिटी, जो फैसला करती है उसको अपने-अपने क्षेत्र में लागू करने की जिम्मेदारी ब्रांच की होती है। ब्रांच उसे लागू नहीं करेगी तो सब फैसला कागजी रह जाएगा। उसका कोई महत्व नहीं रहेगा। इससे हम समझ सकते हें कि पार्टी में ब्रांच सचिव का क्‍या स्थान है। ऊपर के नेतृत्व को राजनीतिक नेतृत्व कहा जाता है और ब्रांच सचिव को सांगठनिक नेतृत्व कहा जाता है। पार्टी को मजबूत करना है तो सांगठनिक नेतृत्व को राजनीतिक नेतृत्व में उठाने का लगातार प्रयास करना चाहिए।

यह सही है कि ब्रांच सचिव को पहले राजनीतिक, सांगठनिक और विचारधारात्मक ज्ञान हासिल करना चाहिए। न्यूनतम रूप से पार्टी कार्यक्रम एवं पार्टी संविधान पढ़ना चाहिए ओर बार-बार पढ़ना चाहिए ताकि वे उसको पूरी तरह समझ सके और दूसरे को समझाने की क्षमता हासिल कर सकें। सचिव अनपढ़ हो तो किसी से बार-बार पढ़वाकर समझना पड़ेगा। इसके बिना कोई ब्रांच सचिव हो नहीं सकता। सबको यह काम करना ही पड़ेगा और तब हम अपने क्षेत्र में पार्टी बना सकेंगे।

पार्टी ब्रांच के सदस्य जनता के साथ सीधा संबंध रखते हैं। रोज जनता से मिलते हैं, उसको सुनते हैं। आम जनता के सबसे नजदीकी नेतृत्व ब्रांच सचिव होते हैं। जनता की आवाज सुनना, समझना और पार्टी के ऊपर के नेतृत्व की नजर में लाना उनका काम है। उसी प्रकार पार्टी के हर वक्तव्य को जनता के बीच ले जाना भी उनका काम हे। वे जितनी योग्यता के साथ काम करेंगे, उतनी ही पार्टी जनता से जुड़ेगी और पार्टी बनेगी और बढ़ेगी।

योग्य ब्रांच सचिव के बिना पार्टी नहीं चल सकती। पार्टी सचिव पहले अपने ब्रांच के सब सदस्यों को संचालित 'करेंगे। साथ-साथ अपने क्षेत्र के अन्दर सब जन संगठनों का मार्गदर्शन करेंगे और जनता की हर समस्या में सामने रहकर उसका मुकाबला करने में मदद करेंगे। ब्रांच सचिव अपने क्षेत्र के हर मामले में नेतृत्व देने के लिए प्रधान व्यक्ति हैं। इसी रूप में हम सबको तैयार होना पड़ेगा ताकि हम अपने क्षेत्र में पार्टी, जनसंगठन और आम जनता को नेतृत्व दे सकें। 

अपनी पार्टी के विकास के लिए ब्रांचों की संख्या बढ़ानी है। पार्टी में नए-नए लोगों को भर्ती करना है। 3 से ।5 सदस्य को लेकर एक ब्रांच होता है। ब्रांच बढ़ने के साथ-साथ, नया-नया योग्य ब्रांच सचिव तैयार करना पार्टी के लिए सबसे जरूरी काम है। दुर्भाग्यवश, 20 प्रतिशत से ज्यादा योग्य ब्रांच सचिव पार्टी में अभी तैयार नहीं हुए हैं और जबतक ये काम नहीं होगा पार्टी बढ़ने की कोई उम्मीद नहीं है। इसलिए ईमानदारी के साथ हम सबको योग्य ब्रांच सचिव बनने की कोशिश करनी चाहिए।

हमारी पार्टी में ब्रांच का आकार 3 से 5 सदस्य तक है। कारण क्रांतिकारी पार्टी का काम छोटे-छोटे दल में बांठ कर ही हो सकता है। भारी भीड़ लेकर ये काम नहीं हो सकता। पार्टी की गोपनीयता, सांगठनिक चर्चा, उपलब्धियों का विश्लेषण और सही नतीजे पर पहुंचना और उसको लागू करने में नेतृत्व देना, इन सब कामों के लिये छोटे आकार का ब्रांच उपयोगी है। उस ब्रांच का सचिव हर माने में उस ब्रांच का लीडर है। वही सच्चा लीडर है जो सबकों लेकर चल सकता है। ऊपर के नेतृत्व के लिए ब्रांच सचिव को सही माने में शिक्षित करना बहुत जरूरी काम है। ब्रांच सचिवों को हर परिस्थिति का सामना करना सीखना है। हर विषय को समझ कर उसके आधार पर सही कार्यक्रम तय करने की योग्यता सचिव में होनी चाहिए। पार्टी सदस्य या आम जनता जो सवाल उठाएगी उसका सही जवाब देने की योग्यता सचिव में होनी चाहिए, क्षेत्रों में कोई जरूरी सवाल पर आंदोलन खड़ा करना और उसको आगे बढ़ाने की हिम्मत ब्रांच सचिव में होनी चाहिए।

पार्टी संगठन को बढ़ाने के लिए ब्रांच सचिव को निरन्तर प्रयास करना चाहिए। अपने क्षेत्रों में काम करने वाले सारे जनसंगठनों के सक्रिय कार्यकर्त्ता पर नजर रखनी चाहिए और उसी के अन्दर से चुन कर साथियों को AG (Auxiliary Group) या सहायक ग्रुप में भर्ती करना चाहिए। उसके बाद खुद या एक योग्य ब्रांच सदस्य को उस AG (Auxiliary Group) या सहायक ग्रुप को चलाने की जिम्मेदारी देनी चाहिए। AG कमिटी का नियमित सभा बुलाना, सभा में पार्टी की राजनीति की चर्चा करना, नये कामरेड को संगठन और आंदोलन के बारे में शिक्षित करना उसकी जिम्मेदारी है। 6 महीने के बाद AG कमिटी से योग्यता प्राप्त कॉमरेड को उम्मीदवार सदस्य के रूप में पार्टी में भर्ती करना चाहिए। इसी तरह लगातार पार्टी बढ़ाने का नेतृत्व ब्रांच सचिव को देना चाहिए। बिना AG में रखे हुए कभी सदस्यता नहीं देनी चाहिए।


ब्रांचों की कमजोरी

अनेक ब्रांच सचिव अपने ब्रांच को पार्टी संविधान के मुताबिक चला नहीं पा रहे हैं। नियमित रूप से ब्रांचों की बैठक नहीं बुलाते। ।5 दिनों में एक बार ब्रांच की बैठक होनी चाहिए। किसी भी हालत में एक महीने से ज्यादा देर नहीं होनी चाहिए। मगर कई ब्रांच ऐसे हैं जो साल में एक या दो मीटिंग करते हैं। ऐसे ब्रांच को जिन्दा ब्रांच नहीं कहा जा सकता। ऐसा ब्रांच न पार्टी को आगे बढ़ा सकता है और न जन आन्दोलन को। आप इस कमजोरी से निकलना ही पड़ेगा। पार्टी ब्रांच को तरीके से चलाना होगा। चिट्ठी देकर या निश्चित रूप से खबर देकर ब्रांच बैठक बुलानी पड़ेगी। बैठक का एजेंडा पहले से सदस्यों को बताना पड़ेगा और उसके मुताबिक बैठक में चर्चा करनी होगी। हर बैठक में पिछली बैठक के कार्यक्रम की सफलता या असफलता की चर्चा करना और सदस्यों की जिम्मेदारी के अनुपालन की चर्चा होनी चाहिए। निष्क्रिय सदस्य को सक्रिय बनाने की कोशिश करनी चाहिए और जो सक्रिय न होते हैं, उनको पार्टी में नहीं रखना चाहिए। लम्बे समय तक निष्क्रिय सदस्य को पार्टी में रहने से नुकसान होगा मगर जब खुद ब्रांच सचिव ही निष्क्रिय हो जाता है तो वे सदस्यों को कैसे सक्रिय करेंगे? ब्रांच को सक्रिय रखने की जिम्मेदारी सचिव की है।

अनेक ब्रांच सचिव पार्टी सदस्य या जनसंगठनों का मार्गदर्शन नहीं कर पाते क्योंकि वे खुद ही जानकार नहीं होते। इसीलिए ब्रांच सचिव को नियमित रूप से पार्टी पत्रिका या मार्क्सवादी साहित्य पढ़ना चाहिए ताकि' वह सही ढंग से पार्टी चला सके। ब्रांच सचिव अपने क्षेत्र का नेता है, इसलिए उसे सभी नेतृत्वकारी गुण हासिल करना चाहिए। अपने काम से जनता के बीच में लोकप्रियता हासिल करनी चाहिए। जनता की हर मुसीबत में पार्टी नेता को आगे आना चाहिए और मदद करनी चाहिए। हमारे कई ब्रांच सचिव यह सब करने में असमर्थ हैं, इसलिए पार्टी को बढ़ाने में भी कामयाब नहीं होते।

ब्रांच का आधार अपनी पार्टी की शक्ति पर निर्भर करता है। गांव के आधार पर या मोहल्ले के आधार पर या पंचायत के आधार पर, शहर में वार्ड के आधार पर या फैक्ट्री के आधार पर या स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी के आधार पर एक-एक ब्रांच का गठन किया जा सकता है । जहां पार्टी समर्थक या कोई न कोई जनसंगठन काम करता है, उसी के आधार पर पार्टी ब्रांच बन सकता है। ब्रांच सचिव को ये सब ध्यान में रखते हुए पार्टी बढ़ाने की लगातार कोशिश करनी चाहिए।

अनेक ब्रांच के क्षेत्रों में नियमित राजनीतिक कार्यक्रम या जनता की समस्या पर पार्टी का हस्तक्षेप दिखाई नहीं पड़ता। इसलिए वहां पार्टी की संघर्षकारी छवि जनता की नज़र में नहीं आती। उच्च नेतृत्व ब्रांच सचिव या ब्रांच सदस्यों को इस काम में सचेत करने की लगातार प्रयास नहीं करते। ऊपर से नियमित और सही निर्देश न पहुंचाने से सदस्यों की चेतना का विकास  नहीं होता और ऐसे सदस्य पार्टी को बढ़ा नहीं सकते। एक योग्य ब्रांच सचिव ऐसे काम के लिए बहुत ही आवश्यक है। कॉ. लेनिन ने बताया “ब्रांच सचिव, जो पार्टी पत्रिका नहीं पढ़ते सिर्फ उस पद के लिए उपयुक्त नहीं है ऐसा नहीं है बल्कि वे पार्टी के लिए हानिकारक भी है। का. लेनिन की इस चेतावनी से हम समझ सकते हैं कि हमें क्या करना चाहिए।


ब्रांच बैठकें और जरूरी कर्त्तव्य

नियमित ब्रांच मीटिंग बुलाना ब्रांच सचिव का आवश्यक कर्तव्य है। ऊपर की कमिटी की हर मीटिंग की बात या ऊपर की कमिटी का कोई सर्क्यूलर आने से ब्रांच की मीटिंग बुलानी चाहिए। हर ब्रांच सभा में कुछ राजनैतिक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। इससे सदस्यों की चेतना का विकास होता है। इसके बाद ऊपर की कमिटी का सर्क्यूलर पढ़ना चाहिए और उसके आधार पर अगला कार्यक्रम तय करना चाहिए। अलग-अलग सदस्यों पर एक-एक काम की जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। अगली मीटिंग में उसके काम की रिपोर्ट लेनी चाहिए। हफ्ते में एक बार बैठक करना अच्छे ब्रांच का परिचय है, नहीं तो ।5 दिन में एक बार बैठक होनी चाहिए, महीने में एक बार तो होनी ही चाहिए। कुछ विशेष घटना या समस्या आ जाए तो एक विशेष बैठक होनी चाहिए। ब्रांच बैठक में कभी-कभी पार्टी अखबार या दूसरी पार्टी पत्रिका से विशेष लेख पढ़ना चाहिए। सचिव को कोशिश करनी चाहिए कि हर बैठक में लिखित रिपोर्ट पेश करे। आर्थिक मामलों पर ब्रांच को पारदर्शी होना चाहिए और सभा में हिसाब देना चाहिए। हर ब्रांच में एक कॉमरेड को पार्टी फंड का और एक कॉमरेड को पार्टी पत्रिका की जिम्मेदारी देनी चाहिए। ब्रांच की बैठक में तहसील ( लोकल ) या जिला कमिटी का एक सदस्य अवश्य उपस्थित रहना चाहिए।

ब्रांच बैठक में केन्द्र, राज्य या जिला से दिये हुए कार्यक्रम की चर्चा होनी चाहिए और उसे किस तरह क्षेत्र में लागू किया जाए, उसकी भी चर्चा होनी चाहिए और सदस्यों के बीच में जिम्मेदारी बांट देनी चाहिए। स्थानीय समस्या की ब्रांच में चर्चा होनी चाहिए और उसी के अनुसार आन्दोलन का कार्यक्रम तय करना चाहिए। याद रखना चाहिए कि ऐसे आंदोलन से ही पार्टी बनती है। पानी, बिजली, रास्ते, नाला, खेती की समस्या, नौकरी आदि स्थानीय समस्याओं से लोग पीड़ित रहते हैं और इसके खिलाफ लड़ाई में वे उत्साह से शामिल होते हैं। इसलिए स्थानीय आंदोलन पार्टी बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अंश है। ब्रांच सचिव को इसमें ज्यादा ध्यान देना चाहिए|

जनता के बीच में नियमित काम करने के लिए ग्रुप मीटिंग करनी चाहिए। गांव या मोहल्ले में छोटे-छोटे ग्रुप मीटिंग में जनता को पार्टी की बात बतानी चाहिए। इससे जन संपर्क मजबूत होगा और नये लोग पार्टी के साथ जुड़ेंगे और पार्टी बनाने में मदद मिलेगी।

पार्टी बढ़ाने के लिए पार्टी पत्रिका की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। हर ब्रांच क्षेत्र में पार्टी पत्रिका का प्रचार बढ़ाना चाहिए। पीडी, लोकलहर आदि पत्रिका नियमित रूप से जनता के बीच में बेचना चाहिए। एक साथ बैठकर पार्टी पत्रिका पढ़नी चाहिए ओर उस पर चर्चा करनी चाहिए। हर पार्टी सदस्य को अवश्य ही पार्टी पत्रिका पढ़नी चाहिए। हर ब्रांच सचिव को एक पत्रिका लोकलहर खरीदनी चाहिए। ये सारे काम देखना ब्रांच सचिव की जिम्मेवारी है। कितने कामरेड ये काम करते हैं? मार्क्सवादी साहित्य पढ़ना पार्टी के लिए अनिवार्य है। नियमित रूप से इस पर शिक्षण शिविर होनी चाहिए। कितने ब्रांचों ने अभी तक पार्टी क्लास संगठित किए हैं, इसका हिसाब चाहिए ।

पार्टी चलाने के लिए फंड अति आवश्यक है। प्रचार आंदोलन के लिए अर्थ जरूरी है, आफिस के लिए, होलटाइमर के लिए फंड जरूरी है। इसलिए नियमित रूप से जनता से पार्टी फंड संग्रह करना चाहिए। ब्रांच का खर्चा चलाना या ऊपरी कमिटी का कोटा देने के लिए Mass collection (जन संग्रह) का कार्यक्रम लेना चाहिए। घर-घर जाकर फड इकट्ठा करना चाहिए। जनता से मांगने से जनता कभी इंकार नहीं करती, मगर हमारी कमजोरी है कि हम जनता के पास जाते नहीं। ये कमजोरी दूर करना अति आवश्यक है और हर ब्रांच को नियमित फड संग्रह का कार्यक्रम लेना चाहिए। एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि फंड का सही हिसाब रखना जरूरी है और अपने ब्रांच में और ऊपरी कमिटी को हिसाब देना चाहिए। ब्रांच सचिव सभी इस कार्य को प्रारंभ करें।

जनता के साथ घनिष्ठ संपर्क स्थापित करने के लिए जन संगठन तैयार करना अत्यंत जरूरी है। इसलिए अपने क्षेत्र में किसानों के बीच में किसान सभा, खेतिहर मजदूर के बीच खेतिहर मजदूर यूनियन, महिलाओं के बीच में महिला समिति, युवाओं के बीच में नौजवान सभा, छात्रों में एसएफआई और मजदूरों के बीच में CITU ( सीदू ) आदि संगठन तैयार करना कम्युनिस्ट पार्टी का मुख्य काम है। ब्रांच सचिव अपने ब्रांच सदस्यों को अलग-अलग जनसंगठन तैयार करने की जिम्मेदारी दे सकते हैं। जनसंगठन आजादी के साथ जनता के बीच में काम कर सके, ऐसा निश्चित करना चाहिए। जनसंगठन के द्वारा जनता के बीच में पार्टी का विचार पहुंचता है। पार्टी का आधार बढ़ता है और जनसंगठनों के नेतृत्वकारी साथी धीरे-धीरे पार्टी के अंदर आते हैं। इसलिए ब्रांच सचिव को इस काम में भी ध्यान देना चाहिए।

ब्रांच सचिव जब सदस्य के बीच में काम बांटे तब सदस्य की योग्यता को ध्यान में रखे। जो कॉमरेड जो काम कर सकते हैं उनको वही काम देना चाहिए। उस काम में उसको नियमित प्रोत्साहन देना चाहिए, साथ-साथ उसके काम की समीक्षा भी करनी चाहिए। कई ब्रांच सचिव सारे काम अकेले करना चाहते हैं और काम बांटने में रूचि नहीं लेते हैं, ये बिल्कुल गलत है। ये व्यक्तिवादी रूझान है, इससे पार्टी का नुकसान होता है इसलिए काम बांटकर Collective Leadership (सामूहिक नेतृत्व) तैयार करना चाहिए।

पार्टी के अंदर सामंतवादी रूझान दिखाई पड़ता है। पार्टी के अंदर जात-पात जैसा कुप्रभाव देखने को मिलता है। ये हमारी पार्टी के लिए घातक है। हमारी पार्टी मजदूर वर्ग की पार्टी है। हर मेहनतकश को इस पार्टी में आने का, इसमें काम करने का या इसमें नेतृत्व करने का पूरा अधिकार है। ब्रांच सचिव को देखना है कि इसका अनुपालन हो। सब सदस्यों को समान मर्यादा मिले, ऊंच-नीच की भावना ना रहे। सब कॉमरेड मिलकर एक परिवार की तरह पार्टी को चलाएं। कितने कामरेड ऐसे सोचते हैं मुझे मालूम नहीं। मगर इतना ही कहना चाहूंगा कि यदि हम कम्युनिस्ट पार्टी बनाना या बढ़ाना चाहते हैं तो हमें सबको लेकर चलना पड़ेगा। इसकी मुख्य जिम्मेदारी ब्रांच सचिव की हे।


पार्टी सदस्यता का नवीकरण

कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य जनता का नेता है। हर सदस्य में नेतृत्वकारी गुणवत्ता होनी चाहिए। पार्टी सदस्य पार्टी का न्यूनतम अनुशासन का पालन ना करे तो वह कम्युनिस्ट होने के योग्य नहीं है। हर सदस्य को कम से कम चार काम करना आवश्यक है। नियमित सभा में हाजिर रहना / पार्टी को नियमित लेवी देना / कोई एक जन संगठन में काम करना और जन आन्दोलन में हिस्सा लेना। इसके अलावा पार्टी पत्रिका पढ़ना जरूरी है। ब्रांच सचिव का कर्तव्य बनता है कि वह देखे कि उसके ब्रांच सदस्य ये काम ठीक से कर रहे हैं या नहीं, ना करें तो उसको उनसे करवाना है। जो बिल्कुल नहीं करते उसको पार्टी से निकालना है। सचिव सबको बराबरी की नजर से देखेंगे और कोई भेदभाव नहीं करेंगे। हर साल हर सदस्य के काम की पूरी समीक्षा के आधार पर उसकी सदस्यता का नवीकरण करना चाहिए। हर सदस्य को अपने काम का ब्योरा देने के लिए नवीकरण फार्म भर कर अपनी लेवी और सदस्यता चंदा के साथ जमा करना चाहिए। नवीकरण ब्रांच बैठक में, बैठक कर ही करना चाहिए। ये सब काम ठीक ठीक करने की जिम्मेदारी ब्रांच सचिव की हे। हर ब्रांच सचिव को ये काम ईमानदारी से करना चाहिए। 

हरेक ब्रांच को अपना काम सुचारू ढंग से चलाने के लिए एक ठिकाना चाहिए। अगर ब्रांच के पास इतना धन है कि वह किराये पर कार्यालय चला सके तो ऐसा ब्रांच सचिव को प्रयास करना चाहिए। अगर पैसे का अभाव है तो सचिव स्थानीय स्तर पर किसी पार्टी कॉमरेड के दरवाजा या दलान का भी इस्तेमाल कर सकता है। ब्रांच कार्यालय में पार्टी का झंडा, बैनर, फेस्टून आदि भी रखना चाहिए। पार्टी कार्यालय में पार्टी पत्रिका भी रखनी चाहिए और ब्रांच सचिव को रोज दफ्तर में कुछ समय लिये रहना चाहिए। हर पार्टी सदस्य को प्रतिदिन कम से कम एक दो घंटा पार्टी और जनसंगठन का काम करना चाहिए। ब्रांच सचिवों को AG सदस्यों, पार्टी सदस्यों को कुछ न कुछ जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए और उनके कामों को नियमित रूप से लेखां-जोखा करना चाहिए और ब्रांच सचिव को ब्रांच के कामों का ब्योरा अपने ऊपर की कमिटी को लिखित रूप में भेजना चाहिए।

बिहार जैसे राज्य, जहां गरीबी, दलितों, महिलाओं पर सामंतों का जुल्म अपने चरर्मोत्कर्ष पर है, ऐसी परिस्थिति में राज्य में आंदोलन विकसित करना ज्यादा आसान है। अगर हम राज्य की तस्वीर को बदलना चाहते हैं तो एकजुट होकर पार्टी के निर्माण कार्य में जुट जाएं और आगे आने वाले दिनों में जन-जन तक पार्टी का संदेश ले जाएं और एक विशाल जन-आंदोलन का निर्माण करें, ताकि बिहार में सबसे मजबूत पार्टी के रूप में सीपीआई (एम) देश के नक्शे पर आ सके। अपने संघर्ष, आन्दोलन को हम इस तरह विकसित करें कि आगामी कुछ वर्षो में सीपीआई (एम ) बिहार की धरती पर मुख्य विरोधी दल के रूप में उभर कर आए।


[लोकजनवाद, वसंत विशेषांक 2008 में प्रकाशित लेख का सम्पादित अंश]




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