उद्वोधन
तुम्हारे देह त्यागने
के तीसवें दिन तुम्हारे साथ जो मेरी बातचीत हुई, उस दौरान तुमने कहा था कि अगर शुद्धाचार,
शुद्धचिंता और शुद्ध आचरण न हो तो तुम्हारे साथ आगे और मिलन की संभावना नहीं होगी।
तुमने यह भी कहा था कि तुम्हारी तरह न होने पर उन्नत मिलन की भूमि पर नहीं पहुंच पाउंगा।
उस दिन से तुम्हारी
तरह होने के लिये मैं और भी व्याकुल हुआ। फिर उसी दिन से न जाने क्यूँ तुम्हारे गुणों
का वर्णन करने लगा। उसी वर्णन के क्रम में इस जीवनी के लेखन की शुरुआत हुई। कितनी ही
बार ऐसा हुआ कि तुम्हारे गुणों का वर्णन करने में मैं मग्न हो गया। जब अपने देह में
थी तब मिलित जीवन की इस कहानी को तुम कितनी चाह से सुनती थी। कितनी बार पत्रों में
मैंने इस कहानी का वर्णन तुम्हे सुनाया है। आज तुम मेरे कितने पास हो! आओ, दोनों मिल
कर फिर से उस चिरपरिचित पवित्र कहानी की चर्चा करें।
जितने दिन तुम देह
में थी, हम दोनों ने सदा एक दूसरे के जीवन के साथ जुड़ने का प्रयास किया। आज भी मैं
वही कर रहा हूँ। इसी में हमारी उन्नति है, हमारी अनंत आशा है। पूरी तरह आत्मविस्मृत
हो कर, गंगा और यमुना की तरह एक दूसरे में मिलते हुए सागर में जा मिलने में अभी भी
शायद काफी विलम्ब है। तब तक, देखो, मैं तुम्हारी प्रकृति पाने के लिये यतन कर रहा हूँ:
इस बुढ़ापे में निरंतर भिक्षा मांग रहा हूँ ताकि तुम्हारी तरह, सेवा करने के लिये पागल
बन सकूँ। ईश्वर करें, इसी तरह मैं तुमसे मिल सकूँ। ईश्वर करें, इस युग्म-जीवन की कहानी
नरनारियों के काम आए।
अ: प्र:
सूचीपत्र
उद्वोधन
शुरूआत
वधु
पहला परिच्छेद 1866 विवाह
दुसरा परिच्छेद 1867 ससुराल
तीसरा परिच्छेद 1868-71 नवजीवन
चौथा परिच्छेद 1872-74 पहली गृहस्थी
पांचवां परिच्छेद 1874-75 अकेली
गृहिणी
छठा परिच्छेद 1875-76 मोतिहारी में पहली बार
सातवां परिच्छेद 1877-79 बांकीपुर में पहली बार
विकास
गृहस्थ बैरागिन
आठवां परिच्छेद 1880-81 मन का विस्तार
नौवां परिच्छेद 1882-83 तपस्या
का आरम्भ
दसवां परिच्छेद 1884 दैनिक जीवन और बेटी सुसार
का विवाह
इग्यारहवां परिच्छेद 1884-1886 मोतिहारी में दूसरी बार व आस्था
की परीक्षा
बारहवां परिच्छेद 1887-89 बांकीपुर में दूसरी बार
तेरहवां परिच्छेद 1889 राजगृह की तीर्थयात्रा
चौदहवां परिच्छेद 1889 सिमला
के पहाड़
पन्द्रहवां परिच्छेद 1890 राजगृह में दूसरी बार
सोलहवां परिच्छेद 1889-1890 रोग,
शोक में संगिनी
सतरहवां परिच्छेद 1890 देवी
अठारहवां परिच्छेद 1891 आध्यात्मिक विवाह
सेविका बनने की राह
पर
उन्नीसवां परिच्छेद 1891 सेविका
बनने का उद्यम व लखनऊ की यात्रा
बीसवां परिच्छेद 1891 लखनऊ
के कॉलेज में दैनिक जीवन
इक्कीसवां परिच्छेद 1891 दूर या निकट?
बाइसवां परिच्छेद 1891 लखनऊ
के कॉलेज में पहला छ: महीना
तेइसवां परिच्छेद 1891 पत्र-लेखन का परित्याग
चौबीसवां परिच्छेद 1891 पत्र-लेखन
के परित्याग का एक महीना
पच्चीसवां परिच्छेद 1891 लखनऊ के कॉलेज में आखरी
महीना
छब्बीसवां परिच्छेद 1891 लखनऊ के कॉलेज में छोटी
छोटी परीक्षायें
सत्ताइसवां परिच्छेद 1891 बेटी सुसार की परीक्षा
अट्ठाइसवां परिच्छेद 1891 लखनऊ से विदाई और लखनऊ
के परिणाम
उनतीसवां परिच्छेद 1891 लखनऊ से लौटते हुए
परिणति
सेविका
तीसवां परिच्छेद 1892 शिक्षिका
इकतीसवां परिच्छेद 1892 गुप्त गोदावरी
बत्तीसवां परिच्छेद 1893 बीमारी एवं पैसे की चिंताओं
का बोझ
तैंतीसवां परिच्छेद 1893 हीरानन्द
चौंतीसवां परिच्छेद 1893 और अधिक त्याग, और अधिक
आस्था
पैंतीसवां परिच्छेद 1894 पीड़ित
मित्रबंधु
छत्तीसवां परिच्छेद 1894 चिन्मय योग में वृद्धि
सैंतीसवां परिच्छेद 1895 ध्वजा वहन की शक्ति
अड़तीसवां परिच्छेद 1895 ‘तुम्हारे हाथों से वेदना का दान’
उनतालीसवां परिच्छेद 1896 ‘अपने आलय की ओर’
चालीसवां परिच्छेद 1896 मृत्यु की छायाओं से भरी
घाटी
इकतालीसवां परिच्छेद 1896 आनन्द धाम
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